Monday, February 28, 2011

अनमोल


मिट्टी की सौंधी खुशबू का कोई मोल नहीं होता,
क्षण में जो मिल जाये यूँ ही वह अनमोल नहीं होता |
छोटा बिम्ब हिमालय का सूरज का तेज बताता है,
किन्तु हिमालय की चोटी को हर कोई भेद नहीं पाता |
द्रोणाचार्य धरा पर यारों देखो यहाँ वहाँ मिलता,
पर कमबख्त दुहाई देखो कोई कर्ण नहीं मिलता |
श्रेष्ठ नहीं वह जिसके उपर कोई श्रेष्ठ नहीं होता,
श्रेष्ठ वही है जिसके नीचे सर्वश्रेष्ठ पड़ा होता |

Monday, February 7, 2011

वर दे, वीणावादिनि वर दे !



वर दे, वीणावादिनि वर दे !
प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव
        भारत में भर दे !

काट अंध-उर के बंधन-स्तर
बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर;
कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर
        जगमग जग कर दे !

नव गति, नव लय, ताल-छंद नव
नवल कंठ, नव जलद-मन्द्ररव;
नव नभ के नव विहग-वृंद को
        नव पर, नव स्वर दे !

वर दे, वीणावादिनि वर दे।

              -सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'