Friday, September 21, 2012

मजबूरी




देश की हालत इस कदर बदल गई,
दिल भी दुखी, मन भी दुखी |

दिल बोले कुछ कर पगले,देश तुम्हारा है,
मन कहे छोड़ यार, ये किसको गवारा है |

दिल बोले, सिस्टम बदल डाल, कुछ कर डाल,
मन बोले वाह जिस पर पड़ी है सिस्टम की मार,
वह बोले प्यारे सिस्टम बदल डाल |

दिल बोले, कुछ कर,कब तक हाथ पर हाथ धरे बैठा रहेगा,
मन बोले, चुप बैठ,वरना धरने के लिए हाथ भी नहीं रहेगा |

दिल बोले,ये गलत है, तुने हार मान ली,
मन बोले पगले,तभी  तो हमने  डेमोक्रेसी अपना ली |

3 comments:

  1. क्या करें अब तो ये बदचलन ज्योति भी अन्धकार से हारने लगी है ...

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